"जुतो ने जान ली"

bhagirath choudhary

(44)
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सारांश

कुछ जबरदस्ती आखिरी दिन भी हो सकती है
बबिता शर्मा
जी आपने सही कहा विद्या के मंदिर में जूते के साथ प्रवेश ,,,, वर्जित होना चाहिए।
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Geetawali Mishra
अन्तिम पंक्ति "जूते का खौफ हो गया "तो मां का पश्चाताप दिखाना चाहिए कि झाड़ लिया होता तो घटना न घटती ।प्रयास उत्तम है।
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Sunita Dev
nice
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Nutan Varma
वेरी ब्यूटीफुल स्टोरी
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Pink Ajmara
बहुत अच्छी रचना
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Hima Das
👌👌👌👌👌👌👌👌👌💐
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Nitu Raj
बहुत सुंदर प्रस्तुति जूता ने जान ली
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