"जुतो ने जान ली"

bhagirath choudhary

(46)
पाठक संख्या − 926
पढ़िए

सारांश

कुछ जबरदस्ती आखिरी दिन भी हो सकती है
MOHAMMAD AFJAL
👌👌
रिप्लाय
बबिता शर्मा
जी आपने सही कहा विद्या के मंदिर में जूते के साथ प्रवेश ,,,, वर्जित होना चाहिए।
रिप्लाय
Geetawali Mishra
अन्तिम पंक्ति "जूते का खौफ हो गया "तो मां का पश्चाताप दिखाना चाहिए कि झाड़ लिया होता तो घटना न घटती ।प्रयास उत्तम है।
रिप्लाय
Sunita Dev
nice
रिप्लाय
Nutan Varma
वेरी ब्यूटीफुल स्टोरी
रिप्लाय
Pink Ajmara
बहुत अच्छी रचना
रिप्लाय
Hima Das
👌👌👌👌👌👌👌👌👌💐
रिप्लाय
Nitu Raj
बहुत सुंदर प्रस्तुति जूता ने जान ली
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.