जी उठा तुलसी का पौधा

सुनीता माहेश्वरी

जी उठा तुलसी का पौधा
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सारांश

“बन्नो तेरी अँखियाँ सुरमे दानी, बन्नो तेरा टीका लाख का रे......” | शुभदा बड़ी तन्मयता से गुनगुनाते हुए, गहने पहन कर शीशे में देख रही थी | तभी उसके पति शरद सिंह आए और उसकी कमर में हाथ डालते हुए बड़े ...
Samundra Singh Shekgawat Aasalsar
बहुत सुन्दर रचना
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Aakash Goyal
Bahut hi सुन्दर
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Chitra Gupta
Good
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Sunita Gupta
Bahut sundar kahani jai sikhane like
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Tarang Kedia
very beautiful
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Sunita Agarwal
Nice
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Neeru Rastogi
good thought
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Manisha Dewan
very nice
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Seema Thakur
अच्छी लगी,,,,
Suman Mahesh
शिक्षा प्रद कहनी
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