जियें अपने लिये भी

सुधा आदेश

जियें अपने लिये भी
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सारांश

बड़ी मुद्दतों के बाद यह पल आया है, तारों की झुरमुट में शाम बिताई है । भागते रहे चंद कागज के टुकड़ों के लिये महफिल आज अपनों के संग सजाई है । वक्त रूकता नहीं, रूकना तुम्हें होगा, जीना है गर जिंदगी,बात आज ...
अनिल कुमार
बहुत खूबसूरत रचना 👌🙏
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सौरभ जी
बहुत खूब
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Asha Shukla
बहुत खूब ! बेहद खूबसूरत।
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गणेश चंद्र शाह
अति सुंदर
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रमेश पाली
बहुत खूब
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GAURAV Gupta
bahut accha
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