जिंदगी की राहों में

Prashant Vaishnav

जिंदगी की राहों में
(86)
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सारांश

“तुम चले गए, और साथ में वो भी | वो साथ में मेरा प्यार भी ले गई | ऐसा लगता हैं मानो किसी ने दिल में हजारो सुराख़ कर दिए हो | बस एक बात कि ख़ुशी हैं | ये दर्द मुझे याद दिलाता हैं की मुझे उससे प्यार था |”
Nitin Verma
अच्छी कहानी, अगले भाग की प्रतिक्षा में
Vijay raut
sahi hai
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MAHENDERA SINGH
दिल छु लिया भाई आपकी कहानी ने ।
Gudiya kumari
very nice story...next part jldi upload kijiye na plzz
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mansi
waiting for nxt part
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manjit
awesome story...waiting for next part
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shraddha
nyc..next part jldi likhiye
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