जानते तो सभी हैं, पर मानते कितने हैं?

केशव मोहन पाण्डेय

जानते तो सभी हैं, पर मानते कितने हैं?
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सारांश

बात सन 2014 अगस्त की है। तब मन में ठान लिया था कि इस अगस्त में स्वतंत्रता दिवस से प्रेरित लेख होना चाहिए। एक-दो दिन से कुछ मित्रों के फोन का भी दबाव था। लिखने की बेचैनी तो थी, भावों का संसार भी बस ...
Om Dudi
बहुत ही अच्छी रचना हैं! आज के इस दोर में हर व्यक्ति को यह समझना बहुत जरुरी है ।
आशीष
सुंदर रचना ! हम लोगों को आत्मचिंतन और आत्मविश्लेषण की आवश्यकता है ।
Vanita Handa
बहुत बढ़िया श्रीमान
Samta Parmeshwar
सही बात है जानते तो सब हैं पर मानता कोई नहीं है। यथार्थ से अवगत कराते हुए देश के प्रत्येक पहलू , मुद्दे पर दृष्टिपात एक सच्चा देशभक्त ही कान पकड़ कर करा सकता है। देश वासियों को तो दासता की आदत हो गई है।
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