जातिवाद का मकड़जाल

अर्जित पाण्डेय

जातिवाद का मकड़जाल
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सारांश

पापा मै रोहित से प्यार करती हूँ शादी उसी से करुँगी सुधा ने पापा की तरफ देख कर कहा जो की कुर्सी पर बैठकर सुधा की शादी के बारे में सुधा की मम्मी से चर्चा कर रहे थे |पापा एकटक सुधा को देखते रहे ,सुधा ...
Alok Kumar Sharms
Excellent👍👏😆
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Asha Shukla
very nice... impressive and true 💐💐💐💐
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Harshi 😍
उचित विचार
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शोभा शर्मा
सौ प्रतिशत सही है .जब जातिवाद मानते ही नहीं तो सरनेम क्यों लटका कर रखते हैं ऐसे लोग .क्यों लाभ भी लेना है जाति प्रमाणपत्र के आधार पर ?खुले आसमान में अपने पंखों के बल पर उड़ने की कूबत दिखाईये .जाति चाहिये भी है और नहीं भी .गुड़ खायें गुलगुले से परहेज .
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Rajeev Kumar Singh
उस समय की मांग थी आरक्षण, अब किसी जाती और धर्म
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कोमल राजपूत
आपने बहुत अच्छा लिखा और बहुत सच्चा लिखा। आज की स्थिति में आरक्षण की ज़रूरत नहीं रही है, जब थी तब थी पर अब मुझे जहाँ तक लगता है कि आरक्षण के ज़रिये एक सामजिक असन्तुलन बढ़ रहा है।
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Anjani Tiwari🇮🇳
🤔🤔
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seema pal
very nice story par sach sayad yea jaativaad kabhi nhi khatm huga yea suru se hi apna adda jamyea huyea hai
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डॉ.अनुराधा शर्मा
बहुत बढ़िया कहानी लिखी अर्जित तुमने....पर इस देश से ना आरक्षण ,ना ही जाति .. कभी खत्म नहीं होने वाला।
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अर्चना गौरव
अगर आप इस भारतीय समाज से जाति को पूरी तरफ से खत्म करना चाहते हैं तो अपनी बहन की शादी मेरे भाई से कर दीजिये और मेरी बहन की शादी अपने भाई से कर लीजिये....मुद्दा ही खत्म...😷
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