जाओगे कहां

सुधा अरोड़ा

जाओगे कहां
(65)
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सारांश

“ आ गये ? यह लो, खाली हाथ झुलाते चले आये। मैंने कुछ लाने को कहा था ? याद नहीं रहा। कोई नयी बात है ? याद रहता कब है ? अब मैं बाहर भी करूं और घर का सारा जंजाल भी संभालूँ। मरने दो, मुझे क्या पड़ी है। मैं ...
Deepak Dixit
वाह जी वाह
आकाश इफेक्ट
समीक्षा लायक आप ने कुछ छोड़ा ही नही। कोई कमी होती तो उस पर ध्यानाकर्षण कराता भी। मात्र एक पात्र के एकतरफा संवाद से पूरा ताना-बाना ऐसा रचा कि एक बेमिसाल कथा बन गयी। बेहतरीन। बहुत कुछ सीखने को मिला इस कहानी से।
Jyoti Bajpai
बहुत ही सुंदर ।
Mridul Dwivedi
क्या तस्वीर खींची हैं आपने जीवन यापन की,प्रेमचंद जी भी सत्य कह गए,स्त्री वो करुणा हैं,जिसका कोई सानी नही,| कवि की यही वाक्य होंगे, इश्क़ ने ग़ालिब हमें निकम्मा कर दिया, वरना हम भी आदमी थे काम के।
Vikas
बहुत अच्छी लगी
Dk Shanyu
nice.. it's reality
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