ज़रूरतें

डॉ. लवलेश दत्त

ज़रूरतें
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सारांश

“अब फैसला आपको करना है। मेरी बात मानेंगे तो दोनों की ज़रूरतें पूरी हो जाएँगी, वरना...” कहकर स्मृति चली गयी। विवेक अभी तक मुँह नीचे किये बैठा था। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे? इसमें कोई शक ...
Subhash Gupta
सुन्दर रचना जो इस रचना से इक्तेफाक नहीं रखता हो वो कहानी के चरित्र पलट कर पढे
Puja Kedia
Baad m Vivek k ky hua story aachi thi plz post next part also
Aruna Sharma
Nice story
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Sushil Saxena
Nice
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Gunjan Gupta
मोरैलिटी में विवेक जीत गया, पर अब फाइनेंशियली टूटे हुए उस विवेक का आगे क्या हुआ, ये भी दिखाना चाहिये था
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