ज़रूरतें

डॉ. लवलेश दत्त

ज़रूरतें
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सारांश

“अब फैसला आपको करना है। मेरी बात मानेंगे तो दोनों की ज़रूरतें पूरी हो जाएँगी, वरना...” कहकर स्मृति चली गयी। विवेक अभी तक मुँह नीचे किये बैठा था। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे? इसमें कोई शक ...
Aarti Srivastava
sochne par majboor krti huie kahani👍👍👍👏👏👏👏👏👏
विश्वजीत एम
कहानी अछि है, पर इसमे थोड़ासा और टूइस्ट लाना चाहिए था। पाठोको को समझ में आना चाहिए कि विवेक ने इस लिए अपनी नोकरी से रिजाइन दिया, जब उसने, अपनी चार सालकी बच्ची के पैरों को अपने सीने पे लिया तो उसे बहुत बहुत सुकून मिला। उसे महसूस हुआ कि वह दुनिया की सबसे अमीर आदमी है। क्योंकि उसके पास एक कन्या रत्न है। जो कि नोकरी, सैलरी और से भी ज्यादा कीमती है!
Pramila Joshi
जैविक जरुरतों के बारे मे सोचने वाली कहानी।अछा प्रयास
Subhash Gupta
सुन्दर रचना जो इस रचना से इक्तेफाक नहीं रखता हो वो कहानी के चरित्र पलट कर पढे
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