जब तुम जागोगी

असलम हसन

जब तुम जागोगी
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सारांश

जब तुम जागोगी तो देखना बंद मुठ्ठियों ने खोली हैं कैसे बन्द जुबान और,, किस तरह खामोश किए हैं रौंदते क़दमों को जब तुम जागोगी तो देखना कुछ जुगनुओं ने बिछा रखी थी थोड़ी सी रौशनी चन्द फ़ूलों ने बचा रखी थी ...
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