...जब अप्रैल के महीने में नदी की बाढ़ देखने चला गया

Shyamkumar Hardaha

...जब अप्रैल के महीने में नदी की बाढ़ देखने चला गया
(17)
पाठक संख्या − 45
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सारांश

#school ki yaden
कृष्णा खाड़का
बहुत ही सुंदर पंक्तियां हैं
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SANJAY GAJBHIYE
बचपन की यादें और उससे सीख काबिले तारीफ़ है।
राम कुमार
यह दिन मुझे भी अच्छी तरह से याद है भैया श्याम को बहुत खोजा था और भैया जी को स्कूल में अकेले छोड़ कर बड़े हो जाने की प्रतिभा दर्शाता जब घर लौट कर आया तो पकड़ैयाबाबा भैया को लेकर जा सकते हैं के डर से बहुत रोया और खोजा था।।
Kumari Anshu
बहुुत ही मनोरंजक संस्मरण है👌👌
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Anuradha Pachwariya
बहुत ही मजेदार घटना है। बचपन की यादें बहुत कीमती होती हैं। सर "रजनीगन्धा " के सभी पार्ट प्रकाशित हो चुके हैं। आप कहानी पूरी पढ सकते हैं।
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Padmini saini
आह ये कितना अच्छा लिखा है ,, मुझे लगता है आपको इसे "स्कुल की यादे" प्रतियोगिता में भेजना चाहिये जो की अभी सक्रिय है । बहोत सुन्दर रचना ।
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आदित्य मिश्र
बहुत हिं रोमांचक संस्मरण।बचपन यादों को तरोताज़ा करती आपकी यह रचना ऐसी प्रतीत हुई मानो खुद के बचपन को देख रहा हूँ। पहले के शिक्षक काफी खुले विचार के होते हुए भी जरूरत पर अनुशाशन बनाए रखते थे। इस रचना के कोटिशः बधाई स्वीकारें।🙏
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