छलावा

रीत शर्मा

छलावा
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सारांश

सर्दी की गुमसुम सुनसान रात और बारिश रुक रुक कर हो रही थी सड़क पर दूर दूर तक कोह्र्रे की चादर थी चारो तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था ऐसी अँधेरी रात मैं वरुण अकेले ही निकल पड़ा था आज उसके पक्के दोस्त पंकज का जन्मदिन था और उसने सभी दोस्तों को अपने फार्महाउस पर पार्टी दी थी वह शराब और शाबाब का पूरा इन्तजार था वरुण का प्रोग्राम अगले दिन सुबह निकलने का था पर
Amit Rana
achi kahani thi par thodi or lambi hoti to acha lagta
Nirupa Verma
bhut hi shandar aur behtarin h,,, nice and lovely.....
नीता राठौर
गुड ! एक बढ़िया विषय चुना आपने। हवस में इंसान इसी तरह अंधा हो जाता है।
Prashant
कहानी अच्छी है, लेकिन कुछ अधूरा सा रह गया।
शैलेश -इंदौर न 1
शब्दो से स्थितियों का बेहतरीन निरूपण !! कसावट भरी वास्तविक कहानी हो जैसे 👍👍
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