छलावा

अरुण गौड़

छलावा
(354)
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सारांश

राजू ने उसके बारे मे बात शुरू की थी वो बताने लगा की छलावा नाक मे बात करता है, उसके पैर पीछे की तरफ मुड़े हुए होते हैं, उसकी परछाई नही दिखती वो बहुत तेजी से पीछे भागता है और किसी का भी रूप बदल लेता है, और अगर...........
Gourav Rajoria
Sahi h
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Rajeev Kumar
vry gud.bachpan yaad aa gaya.
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PRIYANKA GANGWAL
अच्छी स्टोरी है.
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Prem Shankar Mishra
majedar.
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Avantika
beautiful story
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Kanchan Sharma
बहुत कुछ मेरे बचपन से मिलता. सुंदर रचना
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Yogita Garg
bahut badiya hum bhi Bachpan mein bhoot Bulaya karte the
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डॉ.संगीता ठक्कर
बचपन की याद आ गई । अपने ननिहाल में हम कुछ इस तरह के किस्से सुनते थे । पीपल के पेड़ पर भूत है , बगीचे में झूले पर बच्चे की आत्मा आती है और झूलती है ....😀 सच ये सब छलावा ही तो था ।
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Deepak Rathor
अति सुंदर कहानी है भाई जी
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Priti Mishra
बेहतरीन
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