छबीली

आशुतोष कुमार तिवारी सुमन

छबीली
(151)
पाठक संख्या − 7012
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सारांश

छबीली ......... एक स्त्री ...... डोम जैसी पिछड़ी जाति में पैदा सामान्य स्त्री की दास्तान कोई चमत्कारिक शक्ति नहीं एकदम साधारण शोषण का तिरस्कार का दंश झेलती हुयी............... अछूत होने के बावजूद उसके हुस्न के पुजारी सब बनना चाहते हैं.... समाज के वासना का शिकार होती स्त्री की सामान्य कथा........
Mithilesh Kumari
आजभी दवंग नारी के शील भंग को अपनी शान समझते हैं।
puneeta
lajja ki baat chhabili ke liye nahi ....un neech purushon ke liye hai jinhe aurat sirf shareer dikhti hai ....
दीपक चौधरी
मार्मिक चित्रण
shubham kumar
कहानी अच्छी है, इसमे कुदरा का नाम आया है क्या यह वही कुदरा है जो भभुआ में है।
dr giri
अच्छी है।
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