छत्रछाया

प्रेरणा गुप्ता

छत्रछाया
(11)
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सारांश

*लोककथा - छत्रछाया* एक गाँव में एक बुढ़िया रहती थी | घर में उसे कोई भी प्यार नहीं करता था | बेटा-बहू उसे अपने सिर का बोझ समझते थे | एक दिन वह दुखियारी घर से निकल कर एक बगीचे की ओर चल दी, जहाँ बहुत ...
Rajeev Kumar Singh
कहानियां पढने मे तो आनंद आते. लेकिन जब मोके आते हैं तो शायद हम पीछे हटने मे अपनी आनंद महशुस करते है।
Ravisankar Peddi
बूढ़े लोगों की स्तिधि वृक्षों के साथ तुलना करके अच्छा सन्देश दिया गया है
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डॉ. बीना राघव
अच्छी कथा
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अंकिता भार्गव
बहुत अच्छी कहानी
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कल्पना रामानी
अति सुन्दर भाव...बधाई
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