चेतना(लघु उपन्यास)

रचना व्यास

चेतना(लघु उपन्यास)
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सारांश

उस परम सत्ता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन के साथ श्रीमद्भागवतगीता में उल्लिखित स्थितप्रज्ञ के मूर्त रूप मेरे पापा श्री नन्दलाल व्यास को नमन करती हूँ जो अपने सात्विक कर्मों से हम सबके आदर्शस्वरूप है| तदनन्तर मैं इस लघु उपन्यास ‘चेतना’ की प्रेरणास्त्रोत मेरी आत्मीया सखी सुश्री सुमन पुरोहित का आभार व्यक्त करती हूँ| मेरे मित्र राजेश कुमार विजयवर्गीय एडिटिंग के लिए धन्यवाद के पात्र है| साथ ही सभी पाठकों को नमन जिन्होंने मेरी रचना को अपना समय और चेतना दी|
Davinder Kumar
सामाजिक समस्याओं पर चोट करता हुआ आपका यह प्रयास काबिले तारीफ है
Vikas Munjal
ईस में घटनाओ को सही तरिके से नही जोड़ा है
Somesh Ârmo
👌👌👌👌👌
Vijay Hiralal
accha aur sargarbhit .
सरोज
समाज में फैली कुरीतियों पर प्रहार करती सुंदर रचना 🙏
Neha Gupta
Agar thaan liya jaaye to kuchh b mushkil nahi Bahot hi achhi aur inspiring kahani
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