चुनावी चकल्लस : गांव कनेक्शन

शशांक भारतीय

चुनावी चकल्लस : गांव कनेक्शन
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सारांश

आज सवेरे से ही गांव भर की हवा टाइट है.चुनावी चहल पहल है.मतदान का दिन है.प्राइमरी स्कूल के पीछे बने तालाब में कोई झाड़े फिरने नहीं गया है.फ़ौज का आदमी डूटी पर है.ननकऊ की दुल्हिन जब सवेरे सवेरे निकरी थी ...
नितेश झा
बहुत खुशी हो रही है कि आप यहां भी मिल गए। यह तो आपके उपन्यास का ही नशा है कि हमने आपको ढूंढ लिया। अभी आपकी 12 और रचनाएं पढ़नी है... वाकई गांव की याद आ गई। सचमुच चुनाव लोकतंत्र का त्यौहार होता है
Kumar Devashish
बढ़िया लेखन.... कथा पर पकड़ और बारीकी से वर्णन क्षमता .....दोनों सराहनीय हैं।
अंकेश यादव
बहुत बढ़िया रचना
AKHILESH SHARMA
बढ़िया, लिखते रहो।
Ashutosh Rai
बहुत अच्छा
deepak rai
ग्रमीण भोजपुरी और हिंदी का बेहतरीन संकलन
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