चालीस पार की औरत और एक प्रश्न

वंदना गुप्ता

चालीस पार की औरत और एक प्रश्न
(166)
पाठक संख्या − 5395
पढ़िए

सारांश

चाँदनी रात के नाम से मशहूर गोष्ठी जिसमें तारों की छाँव में धरती के सितारे अवतरित हुए थे और अपनी विचारधारा से अवगत करा रहे थे । खामोशी के पाँव में मानो विद्वतजनों ने अपनी वाणी की बेडी डाल दी थी । आवाज़ ...
Krishna Khandelwal
समझ नहीं आता किन शब्दों मे प्रशंसा की जाए, मेरे पास वो बोल ही नहीं। उत्तम से भी उत्तम, अति,, अति उत्तम
मीरा परिहार
वाहहहहहह
रिप्लाय
Anand Parkash Aggarwal
बहुत ही सुंदर ढंग से रचना प्रस्तुत की गयी है। और बहुत ही मार्मिक वर्णन किया। अति सुंदर लेख 🙏
रिप्लाय
Vandna Solanki
बहुत बहुत बहुत ही सुंदर कहानी,सुंदर,सटीक शब्दसंयोजन,, स्त्री मन को बहुत ही संजीदगी से,स्पष्ट रूप से बयां किया है ।आपने बहुत सी स्त्रियों के मन की बात बेबाकी से की वो भी स्वाभिमान के साथ।।उत्कृष्ट सृजन आपकी कलम से।।साधुवाद वंदना जी,,शुभकामनाएं👌👌👌💐💐💐💐
रिप्लाय
Priya Sharma
बहुत सुंदर । नायाब प्रस्तुति ।
रिप्लाय
Savita Ratiwal
सुन्दर सार्थक रचना के लिए बधाई
रिप्लाय
Teena Sarswat
bahut hi umdAaa lekhni hai aapki
रिप्लाय
Chourasiya brajesh
बहुत अच्छी प्रस्तुती...
रिप्लाय
बिम्मी कुवँर सिहं
वाह... बहुत बेहतरीन...
रिप्लाय
prabha malhotra
मन मोह गई आपकी रचना, साधुवाद
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.