चाकलेट्स और लाल गुलाब

आशीष कुमार त्रिवेदी

चाकलेट्स और लाल गुलाब
(60)
पाठक संख्या − 6563
पढ़िए

सारांश

सचिन ने आत्मीयता के साथ उसका हाँथ पकड़ा " यदि मैं मेहनत करूंगा तो ऐसे बहुत से अवसर मिलेंगे, किन्तु विवाह के समय सुख दुःख में साथ निभाने का वचन दिया था, तुम्हें इस तकलीफ में कैसे छोड़ दूं." प्रतिमा की आँखों से आंसू की अविरल धारा बहने लगी. वो इस प्रेम को पहचान नहीं पाई. सचिन प्यार से उसके सर पर हाँथ फेरता रहा और वह सो गयी.
आकाश इफेक्ट
कथा कम सारांश अधिक लगा। कथानक गतिशील होना चाहिए पर इतना भी नही कि कथा का मूल उद्देश्य दृगित न हो।
रिप्लाय
Monika Khanna
wah simple or sweet story
रिप्लाय
Onam Sharma
mere husband v aise hi hai
Rohit Kumar
कुछ और इन्सीडेंटवजोड़ें
Rekha
so nice
रिप्लाय
Rekha Pandey
f
रिप्लाय
Nitin Mittal
main bhi aisa hi hoon
Rani choudhary
achhii story
रिप्लाय
Sandhya Singh
Khubsurat kahani .😊
रिप्लाय
Pal Lucky
..
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.