चाकलेट्स और लाल गुलाब

आशीष कुमार त्रिवेदी

चाकलेट्स और लाल गुलाब
(69)
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सारांश

सचिन ने आत्मीयता के साथ उसका हाँथ पकड़ा " यदि मैं मेहनत करूंगा तो ऐसे बहुत से अवसर मिलेंगे, किन्तु विवाह के समय सुख दुःख में साथ निभाने का वचन दिया था, तुम्हें इस तकलीफ में कैसे छोड़ दूं." प्रतिमा की आँखों से आंसू की अविरल धारा बहने लगी. वो इस प्रेम को पहचान नहीं पाई. सचिन प्यार से उसके सर पर हाँथ फेरता रहा और वह सो गयी.
Sunand Sharma
Nice
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कोमल 'वाणी'
खूबसूरत
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kumar gourav
छोटे लब्जों में बड़ी बात
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आकाश इफेक्ट
कथा कम सारांश अधिक लगा। कथानक गतिशील होना चाहिए पर इतना भी नही कि कथा का मूल उद्देश्य दृगित न हो।
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Monika Khanna
wah simple or sweet story
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Onam Sharma
mere husband v aise hi hai
Rohit Kumar
कुछ और इन्सीडेंटवजोड़ें
Rekha
so nice
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Rekha Pandey
f
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