चल भाग चल, जिंदगी से...

जयंती रंगनाथन

चल भाग चल, जिंदगी से...
(86)
पाठक संख्या − 8776
पढ़िए

सारांश

गुलाबी पर्चा। पिंक स्लिप। नाम भर के लिए गुलाबी है, ले कर आया है बिलकुल काली खबर। अभय स्तब्ध है। दो मिनट पहले उसने ईमेल में अपना इनबॉक्स खोल कर देखा है-- कंपनी के एमडी का संबोधन है लगभग एक सौ चार ...
Anita's tomar
ए सा भी ंंंंहोता है डरा दिया भई
मीरा परिहार
दोषी आदमी हो पर दोष औरत को ही देता है।अकर्मण्यता और सहज सुख की लालसा से जब कोई भलमानस का खून करता है तो वह माफी के योग्य नहीं,कोई विवशता उसका अपराध क्षमा नहीं कर सकती
eshaan Saluja
samay bahut balwan hota hai aaj Kal paise ka mahatav bahut bad gaya hai Paisa na ho to bahut taklif hoti hai
Anjana Agarwal
shabd nhi kuchh kahne koe
mahesh
परिस्थितियों के आगे विवश... या गलत फैसले लेकर विवश नायक! अच्छी कहानी है
Meenakshi Gupta
वक़्त और तक़दीर कहाँ से कहाँ ले जाते हैं
Kamal Kishor
very stupid story...... only frustration and depressive personality ....
Niharika Mishra
Ek galat faisla aapki zindagi ki dasha ar disha dono ko badal deta h....abhay k manobhavon k bhut achcha prastutikaran kiya aapne.
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.