चरित्रहीन मर्द या औरत

मिनाक्षी मिश्रा -एहसासनामा

चरित्रहीन मर्द या औरत
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सारांश

"माँ मैं खेलने जाऊँ ? " उस महीन जालीदार टाट के एक कोने से झांकते हुए उसने पूछा । " नही सुनयना" दो टूक जवाब देकर वो फिर से मसरूफ़ हो गयी अपनी होठों की रंगत को चटक करने में । आँखों में आज भी सुरमा ...
विनय प्रताप सिंह
सच में बहुत कड़वा स्वाद है,, चरित्रहीन कौन? उम्दा लेखन
RAVINDER RAWAT
nice story, but adjustment krne ki to india m janam se hi training di jati hay hr chiz m adjust kro bs adjust, sacha pyaar bhut km logo ko milta hay or khushnasib hay wo do dil jo har halat m ek dusre k sath khade hote hay or akhir waqt tk sath dete hay.....
Urmila Aditya
kahani ka aant bhut jldi khatm ho gya !
Tarsemsingh Chandi
filmi stail me khaniaa likhte ho
Karnveersingh Rathore
कमाल लेखन, कुछ ही शब्दों में दो जीवन जी दिये ।
PANCHDEV KUMAR
जबरदस्त
Yadein ..
बस एक शब्द "शानदार" 👌👌👌👌👏👏👏
Varsha Sharma
बहुत खूब
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