चरित्रहीन मर्द या औरत

मिनाक्षी मिश्रा -एहसासनामा

चरित्रहीन मर्द या औरत
(534)
पाठक संख्या − 20870
पढ़िए

सारांश

"माँ मैं खेलने जाऊँ ? "उस महीन जालीदार टाट के एक कोने से झांकते हुए उसने पूछा ।" नही सुनयना" दो टूक जवाब देकर वो फिर से मसरूफ़ हो गयी अपनी होठों की रंगत को चटक करने में ।आँखों में आज भी सुरमा सजाया था
Prati
Very nice ...story... Keep it up.. All the best 😘👍👍👍👍👍👍👍👍
Farhan Mo
बहुत सुंदर
Manju bishnoi
so nice story dil me utar gai
Tarak Jha
जबरदस्त
hirdendrasingh
शब्द दर शब्द भावुकता से परिपूर्ण है वाचक को बाध कर रखते है
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.