चंद्रनगर सीरीज भाग-1

सनी शर्मा

चंद्रनगर सीरीज भाग-1
(189)
पाठक संख्या − 19248
पढ़िए

सारांश

पिताजी ने अब तक ये संभाल कर रखा इतना ही लगाव था तो इतने बरसो तक वहाँ से दूर क्यो रहे? क्यो मुह मोड़ लिया उस जगह से जहाँ उन्होंने जन्म लिया, जहाँ की मिट्टी में खेले कूदे, बड़े हुए। पर मैं इससे मुह नही मोड़ सकता। बात जमीन या दौलत की नही है बस बात है इज्जत की । और ये मुझे हर कीमत पर चाहिए। इन्हीं सवालों की तलाश अमित को ले आती है----चंद्रनगर।
Ram
Ram
bahot hi romanchak kahaani h
रिप्लाय
Manoj Kumar
MST
रिप्लाय
bTu Michael
यह मुझे अच्छा लगा मेने इसे share भी किया है
रिप्लाय
Yadav Mita
bahutt....bhayanak...
रिप्लाय
Pratik Bhujel
bahut achchha
रिप्लाय
Rajan Kumar
good job.
रिप्लाय
anjali
anjali
रिप्लाय
Sachin Kumar
wah kya kahani hai very nice
रिप्लाय
SUDHIR NRIPAT CHAUHAN
gazab
रिप्लाय
Seema Mishra
all parts are too gud....very interesting story...
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.