विष्णुप्रिया 【 आशा 】 यादव
सुन्दर लेखन, वास्तव में अब समाज बदल रहा है, कुछ लोग है जो अभी भी, पुराणी प्रथाओं से जुड़े है, और उन्ही में कुछ और भी है जो इन्हें पीछे छोड़ चुके है । मेरी शादी भी गाँव में ही हुई है, मुझे खुद को घूँघट से आपत्ति नही थी, पर अक्सर भूल जाती थी, फिर भी हमे कभी किसी ने नही टोका, और अब हमारे घर में ये घूँघट नही है, हाँ सर पर पल्लू जरूर रखती हूं, पर घूँघट हम चारों बहुओं में कोई भी नही करता । और सास ससुर जी को कोई आपत्ति भी नही है, यहाँ तक की साड़ी ही पहननी है इसका भी दबाव नही है हम पर। जब की हम बहुत ही छोटे से गाँव से जुड़े है । आशा है, जल्द ही यह विचार देश के हर परिवार में हो । आप का जीवन कल्याणकारी हो । शुभमस्तु 🍁🌸🙏
Uma Tyagi
Apne jitni aasani se pratha hatwa di ye aasan nahi hai
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Neetu Kaushik
lekin aj bhi pata pratha kafi had tak h jise log apni shaan samajhte h or isi me hi unki izzat hoti h ye pure bharat warsh se pata nahi nahi kb tak jayega kyuki kuch log to itne ziddi hote h ki pariwar todna manzoor hota h pr parampara nahi (he to tabhi ho sakta h in rishta hone se pahle hi ye baat samne rakhi jàye) kuki mera rishta hone se pahle hi ye baat samne rakhi gayi thi so me gughat nahi karti
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Shyamkumar Hardaha
बहुत ही शानदार और संदेशपूर्ण कहानी. इसे मैं FACEBOOK पर भी शेयर करूंगा.
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Chandra Shekhar
bhai soch to aisi hi honi chahiye par.... ye pratha itni asani se nahi badalti..... jaise apne likh diya
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Archana Khare
बहुत ही समुचित कदम उठाया है आरूषि ने दकियानुसी रीतिरिवाजों के खिलाफ और सफल भी हुई। नेक दिल से और थोडी़ हिम्मत से हम किसी कार्य को करे तो सफलता अवश्य मिलती है। आपकी कहानी घूँघट सराहनीय है।
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bhagirath choudhary
बहुत सुन्दर प्रस्तुति
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Krishna Khandelwal singla
Very nice
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Geeta Sharma
ab to y sub gaio mai hi rh gya hai thik hai kahani
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Ravi Jangid
bahut hi umda
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Arvind Nema
Good thought
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सार्थक और सटीक रचना
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Geeta arora
very nice story
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Shweta Tripathi
Kash itne smjhdar in laws har Ghar me hotey...ghoonghat k always b beti mantey
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Hansraj Ruliyan
very interesting story
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