घूँघट

Neha Sharma

घूँघट
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सारांश

आरुषि ने घूँघट उठाकर ससुराल में जब अपने स्वागत के लिए की गई तैयारियों को देखने की कोशिश की, तो दादी सास ने बहू की तरफ भौहे  चढ़ाकर घूँघट नीचे करने का इशारा किया। आरुषि ने भी बेमन से दादी सास का आदेश ...
Rahul Lata
Nice
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poet baba vk
रूढ़िवादी विचारधारा पर सटीक प्रहार. बधाई बहुत-बहुत बधाई....
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Ranjana Gour
mere sath bhi same aarushi ki trh ho rha hai....abhi mere sadi ko 3 mahine huye hai mere sasural me bhi ghunghat pratha hai orr mere ko bhi sbb tokte rhte hai ....abhi mere or meri sas ke bilkul nhi banti hai main ess family main bilkul khus nhi hu mujhe bilkul pasnd nhi hai ghunght nikalna......fir main city me aagyi rhne ke liye firr bhi bolte hai uthr bhi ghunght nikalna hai ese krna wese krna ect. mujhe abb job bhi krna hai mujhe lgta hai fir yh family dkhal degi .....I'm very sad
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Alka Jha
उत्तम रचना 👍
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रविंद्री चौधरी
बेहतरीन कहानी ..👌👌👌👌
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विष्णुप्रिया 【 आशा 】 यादव
सुन्दर लेखन, वास्तव में अब समाज बदल रहा है, कुछ लोग है जो अभी भी, पुराणी प्रथाओं से जुड़े है, और उन्ही में कुछ और भी है जो इन्हें पीछे छोड़ चुके है । मेरी शादी भी गाँव में ही हुई है, मुझे खुद को घूँघट से आपत्ति नही थी, पर अक्सर भूल जाती थी, फिर भी हमे कभी किसी ने नही टोका, और अब हमारे घर में ये घूँघट नही है, हाँ सर पर पल्लू जरूर रखती हूं, पर घूँघट हम चारों बहुओं में कोई भी नही करता । और सास ससुर जी को कोई आपत्ति भी नही है, यहाँ तक की साड़ी ही पहननी है इसका भी दबाव नही है हम पर। जब की हम बहुत ही छोटे से गाँव से जुड़े है । आशा है, जल्द ही यह विचार देश के हर परिवार में हो । आप का जीवन कल्याणकारी हो । शुभमस्तु 🍁🌸🙏
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Uma Tyagi
Apne jitni aasani se pratha hatwa di ye aasan nahi hai
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Neetu Kaushik
lekin aj bhi pata pratha kafi had tak h jise log apni shaan samajhte h or isi me hi unki izzat hoti h ye pure bharat warsh se pata nahi nahi kb tak jayega kyuki kuch log to itne ziddi hote h ki pariwar todna manzoor hota h pr parampara nahi (he to tabhi ho sakta h in rishta hone se pahle hi ye baat samne rakhi jàye) kuki mera rishta hone se pahle hi ye baat samne rakhi gayi thi so me gughat nahi karti
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Shyamkumar Hardaha
बहुत ही शानदार और संदेशपूर्ण कहानी. इसे मैं FACEBOOK पर भी शेयर करूंगा.
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Chandra Shekhar
bhai soch to aisi hi honi chahiye par.... ye pratha itni asani se nahi badalti..... jaise apne likh diya
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