घुंघरू की आवाज

बी के दीक्षित

घुंघरू की आवाज
(70)
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सारांश

थके मादे रंगा साहब को कब नींद आ गयी उन्हें पता ही नहीं चला | आराम के पश्चात जब रंगा साहब बिस्तर करवटे बदल रहे थे तभी उनका ध्यान एक आवाज पर गया, झुन न .. झुन न झुन न | रंगा साहब ध्यानपूर्वक आवाज को सुनने लगे ,उन्हें ऐसा लगा जैसे उनके कमरे के बाहर कोई औरत पायल पहनकर टहल रही हो | थोड़ी देर तक आवाज सुनने के बाद रंगा साहब अपने आप पर नियंत्रण नहीं पाए और बाहर निकल पड़े ,लेकिन आश्चर्य वहा कोई नहीं था |
Smriti verma
har horror story k ant me aisa hi kuch likhte h ap....maagh ki ek rat me v aisa hi kuch th.
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Mr. Wiliiam
हाआआआआआआ
शिव प्रताप पाल
सरल, सुन्दर, सीधी-साधी अच्छी सी कहानी|विशेष नयापन नहीं था, लेकिन कहने का ढंग अच्छा था|
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Suny Agarwal
hahaha aapne to hasa k dara diya
Anju Chouhan
nice
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Abhishek Singh
write story not shit like this
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