घर जमाईं

Kumar Gupta

घर जमाईं
(63)
पाठक संख्या − 801
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सारांश

जमाना आज से बदलने को आया है । किसी ने ये फरमाया है ,, अब तो बेटी की नही बेटे की बिदाई करायेंगे ,,, और घर जमाई लायेंगे ।।
राधा श्री
क्या बात है.... बहुत खूब.... मज़ा आ गया पढ कर... आप सचमुच ही सुन्दर लिखते हैं गुप्ता जी 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹
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Dhani Vyas
क्या खूब कहा है आपने... इतना बारिक चित्रण , पढ़ कर ही तसल्ली हुई।
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Manju Pant
घर जवाई बना कर आपने बहुत खुबसूरती से समाज को समझाया है आखिर बहू भी किसी की बेटी है ।उसे भी ससुराल मे सम्मान से रहने का हक है ।आखिर बेटी मान कर ही ससुराल मे बुलवा आय ।बहुत खूब सुंदर प्रस्तुति ।
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हेमंत यादव
बेहतरीन रचना...बहुत खूब
Swati Gupta
बहुत खूबसूरत प्रस्तुति है ,सच भी है
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Pammy Rajan
badhiya
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Rajni Bansal
😁😁😁 बहुत सही
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Poonam Kaparwan
अजब गजब जमाना आ गया है घर जवाई बनने का ।अति उत्तम
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Ruchi Gopal
bahut khoob kumar ji achchi seekh di hai aapne sasu maa aur maa ke liye😊
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Meenu Arora Mani
wah kya baat hai
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