गैर भारत

अंकुर त्रिपाठी

गैर भारत
(39)
पाठक संख्या − 1017
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सारांश

चित्र . दिखाते हुए उस सैनिक ने कहा ," सर , यहाँ इतनी गरीबी है कहा नहीं जा सकता | यह के लोगो के पास पहनने को कपडे नहीं है | इन लोगो ने १०० का नोट आज तक देखा नहीं है | ये लोग कोई सामन लेते है है तो उसके बदले सामान ही देते है दुकानदार को !! खाने को रोटी नहीं .... इलाज के लिए अस्पताल नहीं !! सर , हम लोग जब गुजरते है तो अक्सर हम लोगो को उनके बच्चो को देखकर इतनी दया आती है की हम लोग अपने साथ लाये बिस्किट उनके बच्चो को अक्सर दे दिया करते है !! उन बच्चो ने डेरी मिल्क , कैडबरी का स्वाद कभी चखा नहीं है !! आधुनिक भारत वहाँ " गैर भारत " बना दिखाई देता है ! यहाँ न चुनाव होते है और न ही कोई नेता आता है ..... यहाँ की कवरेज करने का प्रयास कभी मीडिया हाउस के लोग भी नहीं करते !! सत्य कभी परोसा ही नहीं जाता !! सर रही बात बलात्कार कि , तो सर , हम लोग ५० - ५० टुकड़ी में ही निकलते है कोई भी सैनिक अकेले कही नहीं जा सकता , यदि चला भी गया तो उसका जीवित आना मुश्किल है !! पूरी यूनिट साथ चलती है , अब आप सोचिये अकेले बलात्कार कैसे संभव है ? सर , ये गांव के लोग आपको दिखाई दे रहें है ...आप इनसे कितना भी कुछ पूछो ये आपको कभी कुछ नहीं बतायेगे ..... सच कहा जाये तो नक्सली कि असली ताक़त यही है | हम जानते है की ये दोषी है , फिर भी हम कुछ नहीं कह सकते कारण पूरे के पूरे गांव ऐसे ही है तो कितने लोगो को मारेंगे !! सर , चित्र में आप जो पगडण्डी देख रहें है दरअसल ये पगडण्डी नहीं राष्ट्रीय राजमार्ग है .... नक्सली जब गुजरते है तो वे हर रस्ते को गहरी खायी में बदल देते है क्यों की जब वे हम पर हमला करे तो हमको सुरक्षा देने के लिए तत्काल सुरक्षा टीम न आ सके !! सर यह सब तभी बदलेगा जब सरकार इसको देश का हिस्सा मानते हुए कुछ विकास करेगी .... अन्यथा हम लोग मरते रहेंगे .... नक्सली बनते रहेंगे !! देश में कितना भी विकाश हो जाये पर सर, मैं उस विकास को बेकार मानता हूँ क्यों कि भारत में अभी भी #गैर_भारत बस्ता है ! "
अभय
आप ने बहुत ही बेहतर ढंग से इस संवाद को प्रस्तुत किया ,जो की #ग़ैर भारत की वेदना को चीख़ चीख़ के बयां कर रहा हैं।। अद्भुत प्रयास!
प्रभात पटेल
सत्य लिखा है आपने
Rahul Rawal
यह लेख वास्तविकता को छुआ
Sn Jeengar
हक़ीक़त इससे भी ज्यादा डरावनी है,,,,क्योंकि भारतीय सत्ता लोकतंत्र की आड़ में पूंजीवादी बनती जा रही है,,,जो पता नही कितने नक्सल एरिये पैदा करेगी।
अजय कुमार शर्मा
एक लेखक होने का बहुत खूब भूमिका निभाया आपने। अपने कलम का ऐसे ही इस्तेमाल करते रहें।शुभकामनाएं। मेरी रचना "वेश्या:मेरी प्रेरणा" एक बार जरूर पढ़ें और समीक्षा भी अवश्य करें।
mahaveer yadav
sir ye issue utana chahiye sayad is kalam ke dam kuch sudar ho sake
Jagmohan Kushwaha
kai jagah waqy galta likha hai
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