गुलाब का पौधा और दीदी

एमडी

गुलाब का पौधा और दीदी
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सारांश

नींद तो ऐसे भाग गई जैसे मेरा कोई उससे वास्ता ही न हो। वो पौधा तो खड़ा था पर ऐसे महसूस हो रहा था जैसे उसके अंदर की रूह क़ब्ज़ कर ली गयी हो। उसके आस पास के पौधे हल्की हल्की हवाओं के झोंकों के साथ झूम रहे थे। और वो गुलाब का पौधा उन सब के बीच बिल्कुल खामोश मुरझाया खड़ा था। उसमें कोई हरकत नही हो रही थी उसका मिट्टी पानी और हवाओं से वास्ता खत्म हो चुका था। न चाहते हुए भी तुरंत मैने अपनी बहन की तरफ देखा वो...
pranali gathibandhe
Kash Meri bhi sister hoti. 😢
Komal 💞
bht hi ashi thi....👌👌🤗🤗👏👏
Narendra Bahadur
अति सुन्दर
Manisha Raghav
बहुत खूब खट्टी मीठी यादें
Madhu Devani
Beautiful story.
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Lajja Sushil
Very nice story love of siblings
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