गुलाबी साड़ी में

विवेक कुमार शुक्ला

गुलाबी साड़ी में
(23)
पाठक संख्या − 713
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सारांश

एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को ख्वाब मे कैसे देखता है और क्या सोचता है, ये उसे बताता है, यही मैंने इसमे उतारने की कोशिश की है, आप सब से निवेदन है कि बताएं मेरी कोशिश कैसी है ।
Vinay Anand
गुलाबी गुलाबी वाह जी
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Rajan Mishra
बेहतरीन लिखा है आपने मनमोहक प्रस्तुति है आपकी रचना
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Dr. Prem Krishna Srivastav
भावप्रवण ।कृपया वर्तनी ( spelling) सबंधी त्रुटियां सुधार लें तो और सुंदर हो जाएगी।
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PRIYANKA GANGWAL
very nice. this colour is my fev.
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Shreya Parashar
Oswm poem
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गोपाल यादव
श्रृंगार रस का बहोत अच्छा वर्णन शानदार
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Reema Bhadauria
Lajawab 😊😊
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Bk Kumawat
😈
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Akhil Pandey
Very Nice poem good imagination
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