गुब्बारे और ग़ुबार भाग 1

राजीव पुंडीर

गुब्बारे और ग़ुबार भाग 1
(27)
पाठक संख्या − 3810
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सारांश

बच्चे रंग-बिरंगे गुब्बारों की तरह होते हैं - बहुत सुंदर और बहुत नाज़ुक भी I हमारी ज़रा सी लापरवाही और हमारे गुस्से का ग़ुबार इनके व्यक्तित्व को तहस-नहस कर सकता है I इसलिए इन्हें प्यार से, दुलार से संभालें, डांटकर नहीं I
Vikas Sharma
सुंदर
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VIVEK RAWAT
very nice
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Rupa Garg
amazing
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Anju Chouhan
bahut acchi
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Manjari Agnihotri
Heart touching dil ko chu gyi
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Punam Khare
bhag 2 gubbare aur gubar ka kab tak prasarit hoga
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Anil Gupta
Very emotional and real
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भारती पाण्डेय
क‌‌ई बार माता पिता अनजाने में ही सही लेकिन बच्चो के साथ बेहद शख्ती से पेश आते हैं।जिसकी वजह से उनकी मासूमियत कहीं खो जाती है। बेहतरीन पोस्ट 👏👏
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Sunita Agarwal
Nice story
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Danvir Kumar
एक बहुत ही खुबशुरत दिल को छू जाने वाली कहानी
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