गुब्बारा

विवेक मिश्र

गुब्बारा
(85)
पाठक संख्या − 7903
पढ़िए
Swarnima Angel
speechless
रिप्लाय
Satyawati Maurya
विवेक जी आपकी कहानी के पढ़ने के साथ साथ अपने जीवन मे घटित एक घटना से जैसे रूबरू हो गई,सारा दृश्य अपनी आँखों के समक्ष फिर चित्रित हो गया।साधुवाद आपको।मार्मिक कहानी।
रिप्लाय
Aruna Ramarao
behtarin
रिप्लाय
Abha Raizada
मौत के करीब जाते हुए इन्सां क्या अनुभव करता है और उससे जुड़े हुए लोग क्या अनुभव करते हैं इसका सटीक वर्णन किया गया है.... लेखक ने कुछ अपनों की yaad दिला दी.... धन्यवाद
रिप्लाय
Anjali Gokhale
A feeling of loneliness .nice story
रिप्लाय
प्रदीप दरक
सजीव चित्रण
रिप्लाय
सिद्धार्थ अरोड़ा
लेखन शैली कमाल। कहानी की गति, उम्दा। वर्तनी की गलतियां न के बराबर (सिर्फ एक, जिससे की जगह जिसस) भाषा शैली आसानी से समझ आने वाली और उपयोगी। अंत निराशावादी होते हुए भी संतुष्टिपूर्ण। इसमें चार या पांच तारे देने का ही चुनाव है वर्ना मैं साढ़े चार तारे देता।
रिप्लाय
Shatrusudan Srivastava
behtareen kahanee
रिप्लाय
Peetambara Malik
different and new story. refreshing
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.