गुंडा

ओमप्रकाश क्षत्रिय

गुंडा
(48)
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सारांश

लघुकथा- गुंडा (ओमप्रकाश क्षत्रिय"प्रकाश") " सभी परीक्षार्थी सीधे बैठ जाए. फ्लाइंग स्कॉट आई हुई है ," पर्यवेक्षक यह कह कर कक्ष में घुमने लगे. मगर रघु दादा के होश ठिकाने थे. उस ने कार्तुश टेबल में घुसा ...
Kamlesh Vajpeyi
अच्छी कहानी !
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रवि सुमन
सटीक
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शशि  श्रीवास्तव
सुन्दर लघुकथा आज की हकीकत  को दर्शाती हुई ओमप्रकाश जी बधाई  
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केशव मोहन पाण्डेय
एक श्रेष्ठ कथा बनी है। लेखनी को प्रणाम। 
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Jitendra Pahadwa
wah
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अरविन्द सिंह
बहुत बढ़िया
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