गांधीनामा

अकबर इलाहाबादी

गांधीनामा
(6)
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सारांश

इन्‍क़िलाब आया, नई दुन्‍या[1], नया हंगामा है शाहनामा हो चुका, अब दौरे गांधीनामा है। दीद के क़ाबिल अब उस उल्‍लू का फ़ख्रो नाज़ है जिस से मग़रिब[2] ने कहा तू ऑनरेरी बाज़ है। है क्षत्री भी चुप न पट्टा न ...
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