गलती मेरी थी, हमेशा रहेगी

निशान्त

गलती मेरी थी, हमेशा रहेगी
(322)
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सारांश

नित्या ने मुझे सेक्स के लिए खुला निमंत्रण दिया था. पता नहीं हैंगोवर था या इस बात से हुई झुन्झुलाहट, मेरा सर दर्द से फट रहा था और मैं फिर सोने चला गया.
Mahesh Sharma
शानदार
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Rajesh Bajpai
achchhi kahani practical approach
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Sunita Kumar
kahani behtareen h bs thodi si lmbi ho gai sir...
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Divya Singh
harbar alag subject hota hai interesting bhi.........ladkiyon ka character. ek jaisa q
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Sarthee Sahu
Aachi कहानी
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और्व विशाल
बहुत बढिया कहानी निशान्त
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आरती अयाचित
बढ़िया प्रस्तुति
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जफर आलम हाशमी हाशमी
निशांत जी अच्छी कहानी लिखी है ।यह कुछ ज्यादा लम्बी हो गई स्त्री का बिंदास पन व शारीरिक आवश्यकता पर एक दस्तावेज है ।पुरुष को बहुत ही बोडम व निम्न रोल मे घढा है फिर भी एक बार पढ़ने पर अंत तक उतसुकता बनी रहती हैं ।अब सरकार ने 477धारा को शिथिल कर दिया उम्मीद है अगली कहानी खुल कर लिखेगें ।बहुत बहुत बधाई
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Khushi Priyanka Gupta
Nitya ko meditation ki jarurat thi.nice Story.
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