गजरे वाली रात

Minni Mishra

गजरे वाली रात
(22)
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सारांश

कमबख्त , टिक-टिक करती घड़ी की सूईयों ने कब, मुझे उनकी नजरों में चंद्रमुखी से ज्वालामुखी बना दिया, पता ही नहीं चला !खाना-पीना, उठाना-बैठना , हर जगह साथ जाना , एक-दूसरे पर मर-मिटना …ये सबकुछ सपना-सा ...
Priyashree Singh
bahut pyari kahani
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Usha Kushwaha
bhut sundar khani
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