खोया बचपन

Indira Kumari

खोया बचपन
(42)
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सारांश

खोया बचपन चलो लेखनी आज स्मरण उसे करा दें जो बालक बना मजदूर नवचेतना जगा दें मजबूर है मजदूर वह बचपन उसे लौटा दें जब नन्हें कोमल हाथ कचरे को उठाता है तब रोम रोम उसका क्रंदन कर रोता है डालें न उसे ...
Savitri Choudhary
Bahut hi sunder kavita . Bal madooron ki vyatha ko aapne shabdon ke madyam se bahut achha proya hai
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Sunil Shukla
बचपन को मजबूर नहीं होने देना है ।यह संकल्प सभी को लेना है। खोया बचपन समाज को जागरूक करने वाली कविता।शानदार एवं सार्थक रचना🍂🍃🌾🌿🌼
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अनुरोध श्रीवास्तव
बहुत सुन्दर👌बचपन तो बचपन है
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Nittu kumar
.........सिक्का उछल कर कहता है..........बहुत संवेदनशीलता से महसूस करके लिखी गई पँक्तियाँ👌👌👌👌👌👌👌👌 खूबसूरत भावों से सजी रचना के लिए बधाई!
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Saira Parvez
बाल मजदूरी पर सुन्दर कटाक्ष है।आप को बधाई
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MAMTA SONI
nice
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Pushpa Dinesh
नाइस कविता
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