खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

सुभद्रा कुमारी चौहान

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी
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सारांश

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार ...
छाया पान्डेय
bahut hi ojmayi kavita. har bhav jagrat karne vali .subhadra ji ki yah rachana sabhi k zuban pr anant smriti tak rahegi .
Ganesh Anima
इस के सामने 5 स्टार भी बौने है।
शुभम सिंह
जब-जब पढ़ता हूँ आँखों से अश्रु छलक पड़ते है शुभद्रा कुमारी चौहान जी की ये रचना सचमुच अद्भुत-अदुतीय है ❤️🙏🙏
Ranjan Mukherjee
बच पन मे ये महान रचना पढी थी।
Amit Saini
इंकलाब जिन्दाबाद
Soni Tushar
khoob ladi mardani vo jhansi vaali rani
Neha Noopur
school ke bad , Jane kitne sal beet gaye, par padhte padhte aaj v romte khade hogaye.
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