खूनी ढाबा (भाग -3)

Roushan kumar

खूनी ढाबा (भाग -3)
(55)
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सारांश

दोनों बस टकटकी लगाय एक दूसरे के चेहरे को निहार रहे थे अब ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वो अपने सोचने की क्षमता ही खो बैठे हो , न चाहते हुए भी उन्हें उस बूढ़े व्यक्ति के बताए बातो को मानना था , इसके सिवा और कोई रास्ता भी तो नही था, एक रास्ता यानी गाड़ी में ही रुकना बचा था उसपर भी बूढ़े ने कुछ नकारात्मक  सोच लगा दिया।
दिनेश दिवाकर
बहुत खौफनाक और डरावना
Aashu Khan
kahani bahut se raaz chhodh gyi wo buddha aadmi kon tha aur us dhabe ka kya raaz tha.
गजेन्द्र भट्ट
रोचक कहानी!
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HBK Micheals
Bhasha bahut hi ashobhniya hai, gali galoch bhi istemal ki hui hain . Thoda dhyan rakhna chahiye ki ye public munch hai
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