खुदगर्ज

Kumar durgesh Vikshipt *Vaishnav*

खुदगर्ज
(36)
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सारांश

क्या देखू अरमान मैं तेरे तुम खुद में जो अरमान लिये हो, कितने शौक जताये दुनिया या हो कोई मायुष घड़ी, नसिहियत किसी की क्या साथ देगी पास जो तुम हो खड़ी, कैसे संजाऊ ख्वाब मैं तेरे तुम औरों के जो ख्वाब ...
Neha Mishra
अतिसुंदर रचना
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Swara S
badiya he
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Raksha Thakur
👌👍
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Bindu Dalwadi
Nice 👌
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Moziram Gurjar 'दिलशान'
बहुत सुंदर
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Nagendra Singh
mast hai
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Vivek Pathak Pathak
दुर्गेश जी आप ने बहुत खुब लिखा हैं ,,,,अभी क्या कर रहे हैं ????
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Satpal. Singh Jattan
very nice and unique style
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Vijay markam
nice
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sharmin shaikh
nice
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