खिड़की

फ़्रेंज़ काफ़्का

खिड़की
(15)
पाठक संख्या − 1996
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सारांश

जीवन में अलग-थलग रहते हुए भी कोई व्यक्ति जब-तब कहीं-कहीं किसी हद तक जुड़ना चाहेगा। दिन के अलग-अलग समय, मौसम, काम-धंधे की दशा आदि में उसे कम से कम एक ऐसी स्नेहिल बाँह की ओर खुलने वाली खिड़की के बगैर ...
मंजुबाला
बहुत बेहतरीन
uma bhatt
कम शब्दों में काफी कुछ बयां है
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