खण्डहर

Neetu Kaushik

खण्डहर
(3)
पाठक संख्या − 40
पढ़िए

सारांश

कभी तो वहाँ पर पायल की आवाज छनकती होगी बच्चॉ की किलकारियां होंगी दीपक की रोशनी जलती होगी,लेकिन अब क्या? यही तो सत्त्य है सब खतम हो जाता है।चाहे वो बहुत नाम वाला हो या आम इन्सान सच्चाई तो यही है कि आज वो पर्यटन का केंद्र ही हैं अब ना तो उसमे किलकारियां गूजेगी और ना ही कोई दीपक ही जलेगा।
Books Station
bht sunder rachna👌👌👌👌
रिप्लाय
sushma gupta
बहुत मार्मिक सुन्दर रचना 👌👌👌👌💐
रिप्लाय
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.