क्वार्टर नम्बर तेइस

दीपक शर्मा

क्वार्टर नम्बर तेइस
(69)
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सारांश

माँ और तीनों बहनों की हँसी अशोक ने बाहर से ही सुन ली| हमेशा की तरह इस बार भी हँसी उसे अचरज तथा रोष से भर गयी| रेल गाड़ियों के धुएं और धमाके के हर दूसरेपल पर डोल रहे इस क्वार्टर नंबरतेइसमें रह कर भी ...
Manju Lata Gola
पुरुष हमेशा से दम्भी होता है उसे नारी की सदाशयता पर भी शंका होती है उसकी मदद लेना जैसे उसका अपमान हो ,शीर्षक कहानी को सार्थक नहीं करता है ,अच्छी कहानी ।
Laxman Tomar
कुछ समझ नहीं आया
puneeta
samay as gaya hai ki ladke is 'mard 'wali defn se bahar nikale....bahut achhi kahani
Bharati Prajapati
Paisthiti koi bhi ho mard hone Ka ahankar jata hi nhi
Mayuri
कहानी अच्छी है लेकिन इसका शीर्षक कुछ और होना चाहिए था
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