क्यूँ आती हो तुम सपनो में

रणजीत प्रताप सिंह

क्यूँ आती हो तुम सपनो में
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सारांश

क्यूँ आती हो तुम सपनो में आँख खुले क्यूँ गायब होती क्यूँ दिल में अरमान जगा के अन्धकार में फिर से खोती || क्यूँ आखिर तुम होश उड़ाती क्यूँकर हौले से मुस्काती ऐसी क्या गलती की मैंने अदा दिखा के क्यूँ ...
Kavi Rohit Kumar
प्रेम की तह तक
mukesh nagar
मन की बात अच्छे से शब्दों में उतार दी आपने।👍
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