क्या यह सच था

संजीव जायसवाल ' संजय '

क्या यह सच था
(180)
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सारांश

उस अंग्रेज का उपरी जबड़ा हल्का सा उपर उठा और उसकी जीभ बाहर निकल आयी । लंबी, काली , लपलपाती हुयी जीभ । उसके शरीर पर चकत्ते उभरने लगे थे और उसका शरीर फर्श पर लहराने लगा था । फर्श पर पड़ा - पड़ा वह आगे की तरफ खिसका जिससे उसकी गर्दन कमीज से बाहर निकल आयी । वह गर्दन आश्चर्यजनक ढंग से लम्बी थी । किसी इन्सान की गर्दन इतनी लंबी नहीं हो सकती थी । जैसे सांप अपनी केंचुल छोड़ देता है, मेरे देखते ही देखते बिल्कुल वैसे ही जेम्स का शरीर अपने कपड़ों को छोड़ कर बाहर निकल आया । अब वह फर्श पर रेंगते हुये मंदिर की तरफ खुलने वाली खिड़की की ओर बढ़ रहा था ।
JP Singh
Nice
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Dr.pankaj soni
jabardast bahut achhi story hai..aage ka ni bataya kya huaa
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Shweta Soni
nice story
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Pramendra Nath
Adbhut 👍👍
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Asmi Srivastava
nice
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नीता राठौर
गज़ब सस्पेंस में बांधा है आपने। शानदार 👌👌👌
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सुधा आदेश
निशब्द
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Vijay Kumar
रहस्य और रोमांच से भरी एक बेहतरीन रचना
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Sijhil Rinki Choudhary
Best स्टोरी
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