क्या यह सच था

संजीव जायसवाल ' संजय '

क्या यह सच था
(200)
पाठक संख्या − 9875
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सारांश

उस अंग्रेज का उपरी जबड़ा हल्का सा उपर उठा और उसकी जीभ बाहर निकल आयी । लंबी, काली , लपलपाती हुयी जीभ । उसके शरीर पर चकत्ते उभरने लगे थे और उसका शरीर फर्श पर लहराने लगा था । फर्श पर पड़ा - पड़ा वह आगे की तरफ खिसका जिससे उसकी गर्दन कमीज से बाहर निकल आयी । वह गर्दन आश्चर्यजनक ढंग से लम्बी थी । किसी इन्सान की गर्दन इतनी लंबी नहीं हो सकती थी । जैसे सांप अपनी केंचुल छोड़ देता है, मेरे देखते ही देखते बिल्कुल वैसे ही जेम्स का शरीर अपने कपड़ों को छोड़ कर बाहर निकल आया । अब वह फर्श पर रेंगते हुये मंदिर की तरफ खुलने वाली खिड़की की ओर बढ़ रहा था ।
Paresh Nath
चमत्कार
पूजा सिराना
kahani to achchi lagi, bs ek baat thodi ajib si lagi, ubad khabad raste par gadi me uchalte hue unhone coffee kaise pi?
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Sudha Jugran
बहुत ही डरावनी कहानी थी। आपकी प्रोफाइल पर पढ़ी थी पहले। आप हर तरह का चित्रण और कल्पना बखूबी करते हैं । कहानी पढ़ते पढ़ते तो पाठक कल्पना से निकल कर यथार्थ में ही सबकुछ महसूस करने लग जाता है ।
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Pooja Verma
😱😱😱😱😱
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JP Singh
Nice
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Dr.pankaj soni
jabardast bahut achhi story hai..aage ka ni bataya kya huaa
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Shweta Soni
nice story
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Pramendra Nath
Adbhut 👍👍
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