क्या मैं भी प्रताड़ित

अक्षय गुप्ता

क्या मैं भी प्रताड़ित
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सारांश

सुहासिनी , तुम्हारा जितना प्यार नाम है , उतनी प्यारी सूरत भी ।  तुम ईमानदार भी हो, काम के प्रति निष्ठा भी है तुम्हारी । तुम्हें पढ़ना-लिखना था, तो आज तुम भी कुछ न कुछ बन जाती । अब दीदी, क्या कहूँ ...
Rashma Yadav
aisi kahaniya padh Kar kuch yaad aa jata h
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अनुश्री त्रिपाठी मिश्रा
बेहद गहरी पंक्तियां अंत की, गलती जरूरी नहीं कि हमेशा पति की ही हो या प्रताड़ित सिर्फ पत्नियां ही होती हों, पर एक बात तो सच है हावी होने की प्रवृत्ति ही मुख्य जड़ होती है किसी भी रिश्ते में छिटकाव की।
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Archana Varshney
ठीक
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पिंकी राजपूत
ये बात ठीक है कि फैसला करने वाले के भी अपने दु:ख/समस्याएँ होती हैं जिनसे वो हार जाता है लेकिन जज साहिबा सुशिक्षिता थीं, वो अपना फैसला खुद कर सकती थीं..
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Jaya Sarwan
mei bhi yahi sab jhel rahi ho.aurat kab khush rahegi kab use nyay milega.na kitabo me aurat sukhi he na real life me har aurat ki yahi kahani.
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Mini Sharma
🔥
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J.p. Jain
जीवन की व घर घर की असली कहानी।
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Deepshikha Maravi
बहुत अच्छे ढंग से आपने महिलाओं की समस्याओं को अपनी छोटी सी कहानी में कह दी।
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Deepa Vaishnav
bhut hi achi khani hai pr pata nhi q ladkiyaa ye sab sahti hai jab tak ladkiyaa apne liye aawaj nhi uthayegj tab tak ye chlta hi rhegaa. bhut si aaurte khti hai ki apne bachoo ka kya hoga ye soch ke aawaj nhi utha pai pr ager bache bi bado ko jurm karna aur sahta dekhenge to Wo bi yahi sikhenge . is liye juram ke khilaf aawaj uthani hi cahiye
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