क्या मैं बैल हूँ ?

ब्रजेंद्रनाथ मिश्रा

क्या मैं बैल हूँ ?
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सारांश

यह एक हास्य -ब्यङ्ग्य की रचना है, जिसमें ब्यङ्ग्य, हास्य के साथ इस तरह घुला मिला है कि दोनों जैसे एकरस हो गए हों। आप रचना को पढ़कर खुद इसका आनंद लें और टिप्पणी लिखना न भूलें।
Mayur Ramswaroop
bahut hi ghatiya likha hai.
धर्मेंद्र विश्वकर्मा
ज़िम्मेदारीयों ने इंसान के साथ कैसा खेला खेल.. कभी गधा बनाया, कभी घोड़ा तो कभी बैल.....
vishal Suriya
mishra ji gazab
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मुकुल सिंह
अच्छी रचना है सर. पढ़ कर आन्नद आया.
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मनोज देशमुख
bahut khub Mishra ji
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Sanjiv Kumar Tiwary
बेहतरीन
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