क्या पता था यूँ रुला देगा मुझे

राहुल द्विवेदी

क्या पता था यूँ रुला देगा मुझे
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पाठक संख्या − 1716
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सारांश

क्या पता था यूँ रुला देगा मुझे । अपना साया ही दगा देगा मुझे ।। आदमी तेरी भला क्या हैसियत ; जो भी देना है खुदा देगा मुझे । कल हवाओं में हुई है गुफ़्तगू ; एक झोंका ही बुझा देगा मुझे । एक पौधा रोप देता ...
प्रीती वर्मा
waah ji ... lajawab..umda creation ji👌👌👌🙏🏻
Amrit Raj Chouhan
बेहद उम्दा...👌
Ravi Singh
मित्र आपकी हर पंक्ति में एक अहसास प्रतीत होता है । बहुत खूब
अनिल कुमार
बहुत ही शानदार 👌👌
Dpk Kswh
उम्दा लेखन
Vaibhav Ahlawat
अत्यंत गहरा व सुभग।
SARiKA
👌👌👌👌👌
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Sukriti singh
kya khoob likha apne
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