कोशिश जारी है....

अंकुर त्रिपाठी

कोशिश जारी है....
(8)
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सारांश

आयशा - यदि प्रेम कर भी लेती हूँ .....तो क्या हम इस प्रेम को अंतिम रूप दे पाएंगे ... क्या हम शादी कर पाएंगे ??? दर्पण- बेशक जो रिश्ते शादी मे न बदले वो निभाये नही जाने चाहिये जैसे कृष्ण ने राधा के साथ नही निभाया था । सोनी ने महिपाल के साथ....... हीर ने रांझे के साथ....... लैला ने मजनू के साथ । गलत ही तो थे ये सब ।। सही कहती हो शादी ही तो सब कुछ है ! शादी कर सको तभी रिश्ते जोङिये । शादी कर सको तो साथ निभाने की कसम खाओ । शादी कर सको तभी करीब आओ । शादी ही तो सब कुछ है । ह्दय की भावनाओ का क्या, ये तो जानवर के प्रति भी होती है । शादी के पहले यदि किसी के प्रति कोई भावनाये आये और वो रिश्ता शादी की दहलीज तक न पहुँचने का अनुमान हो तो बेशक उस व्यक्ति को ठोकर मार देनी चाहिये क्योकि हमारी शादी नही हो रही है । सौदा ही तो है ये भावनाओ का .....दो ह्दय का । स्वार्थ ही तो है यह स्वंय का । इसमे प्रेम कहाँ है ? इसमे समर्पण कहाँ है ?? इसमे त्याग कहाँ है ??? बेशक मेरी बाते गलत हो सकती है आपके नजरिये से परन्तु मैडम मै अपने दिल के बाजार मे सौदागरो को घुसने की इजाजत नही दे सकता । जो मेरा है .....रहेगा ।। मुझे फर्क नही पङता कि शादी हो अथवा न हो । रिश्तो को पूरी भावनाओ और समर्पण के साथ जीऊँगा ....यदि आपको मै गलत लगता हूँ तो मै अपने दिल के दरवाजे से आपको स्वतंत्र करता हूँ । आप स्वतंत्र उङान भर सकती हो ।
shalu choudhary
nyc story... wil wait for d next part.. kindly read my poems too.
sudha mishra
👌👌अगली कड़ी का इंतजार रहेगा
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