कोई विकल्प नहीं

अरविन्द सिन्हा

कोई विकल्प नहीं
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सारांश

सोच बदली, संस्कार बदले। पाश्चात्य के प्रभाव में, चाल-ढाल बदले। सामने कुछ, पीछे कुछ, अभिव्यकि के अनूठे अंदाज़ बदले।। नहीं बदले तो शाश्वत मूल्य, प्रकृति के शाश्वत नियम। श्रद्धा-विश्वास, भावनात्मक ...
विकास तिवारी
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