कोई बात नहीं

दीपक जी सूरज

कोई बात नहीं
(50)
पाठक संख्या − 1462
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सारांश

मुहब्बत उसे मुकम्मल हो जिसे उसकी जरुरत हो, नहीं तो .... "कोई बात नहीं".................
amit
nice
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Shiv Shankar
bahut accha hai kya me bhee isme apni poem dal sakata hai please batana my no.9027643324
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Ravindra Narayan Pahalwan
सूरज जी, रवि को आपकी रचना पसंद आई / लिखते रहें ...
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Nagendra dikshit
Nice ji
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Mridu
बहुत अच्छी लगी आपकी गज़ल 👌
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Sonal
Bahut khubsurat...
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Neelam bharti
wow
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Sunil Das
क्या बात है जनाब! अद्भुत रचना उकेर दी है आपने। पहली दफा में ही छा गए। मैं तो बस इतना ही कहूंगा कि "होनहार पुत के पांव पालने में ही दिख गए"।
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manish
बहुत अच्छा है, बस सब्दो के मतलब में थोड़ा दिक्कत है
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Pawan Sharma
bahut umdaa
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