कोई बात नहीं

दीपक जी सूरज

कोई बात नहीं
(46)
पाठक संख्या − 1125
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सारांश

मुहब्बत उसे मुकम्मल हो जिसे उसकी जरुरत हो, नहीं तो .... "कोई बात नहीं".................
Nagendra dikshit
Nice ji
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Mridu
बहुत अच्छी लगी आपकी गज़ल 👌
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Sonal
Bahut khubsurat...
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Neelam bharti
wow
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Sunil Das
क्या बात है जनाब! अद्भुत रचना उकेर दी है आपने। पहली दफा में ही छा गए। मैं तो बस इतना ही कहूंगा कि "होनहार पुत के पांव पालने में ही दिख गए"।
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manish
बहुत अच्छा है, बस सब्दो के मतलब में थोड़ा दिक्कत है
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Pawan Sharma
bahut umdaa
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Ajhar Shaikh
good one
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Sanskar Ritesh
mast hai boss
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shivam sharma
good work
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