कोई नाम न दो

ज्योत्सना कपिल

कोई नाम न दो
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सारांश

बेटी से बात करके शिवानी के हृदय में ममत्व का सागर सा उमड़ने लगा। दो साल गुज़र गए थे उसे देखे हुए। जबसे दामाद का सिंगापुर की ब्रांच में तबादला हुआ था अब तक भारत आने का समय नही निकाल पाए थे। अक्सर वीडियो ...
Beena Awasthi
ज्योत्सना जी बेहद अच्छी और भावपूर्ण कहानी। कुछ रिश्ते किसी नाम के मोहताज नहीं होते, लेकिन हम जिस समाज में रहते हैं उसकी मान्यता को बदलना आसान नहीं होता। यदि शिवानी को श्रेया के पति की तरह सच्चाई पता होती तो शायद स्थिति इतनी गंभीर न होती लेकिन अनिमेष ने श्रेया के संबंध मे खुद तो कुछ बताया नहीं और हर प्रकार से छुपाने का प्रयास किया जो कि गलत है। शब्दों और भावनाओं को आपने बड़ी कुशलता से पिरोया है।
Pawan statham
बहुत ही उम्दा लेखनी है। शब्दों का जाल पूरी दुनिया बनता चला जाता है। अद्भुत रचना।
Sunita Veer
Bahut hi bhavnatmak sunder kahani
Sangita Ajmera
amazing bahut sundar speechless
Vijay Hiralal
bahut accha , Saaf man se kiya gaya sarthak prayas
Hemant MOdh
"सना"जी, सादर अभिवादन आपकी कहानी गहरे तक उतर गई, दिल में... बहुत बढ़िया नहीं, बहुत बढ़िया से कई गुना बढ़िया से भी ज्यादा बढ़िया हैं यह कहानी, काश फाइव स्टार रेटिंग से ज्यादा आकाश के अनगिनत स्टार की रेटिंग की हकदार हैं, यह कहानी... आपने आपकों आपकी कहानी के किरदारों में डूबा महसूस कर रहा हूं ! काश कि इस कहानी पर कोई फिल्म बनाएं ! Email : filmvisualizer@gmail.com हेमन्त मोढ़: HOD- Filmography National Film Academy... Film-Visualizer: Filmography National Magazine.. Powered by Leo-Media News Network
Preeti Saxena
ये सच है पर लोग नहीं समझते
Rahul Bhandari
mujhe padne ka shok bachpan se raha he bahut hi Khoobsurat rachna
richa
bahut sunder rachna hai. Is vishay par bahut hi achchi tarah se likha hai.
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